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by admin

चमोली

Chamoli

BADRINATH TEMPLE
BADRINATH TEMPLE

चमोली जिले को जाने हिंदी में:

Know about Chamoli District in Hindi:

चमोली जिले को उत्तराखण्ड का ताज भी कहा जाता है। यह अपने प्राकृतिक सौन्दर्य, ग्लेशियरों और मंदिरो के लिए विश्व विख्यात है। पहले ये एक तहसील था जिसे 24 फरवरी 1960 को अलग कर एक नया जिला का रूप दे दिया गया। उस समय चमोली को ही इस जिले का मुख्यालय बनाया गया था तथा गोपेश्वर यहाँ से 12 किमी बसा हुआ एक छोटा सा गांव था।

वर्तमान मे यहाँ का प्रशासनिक मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित है। यह पूरा जिला गढवाल संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आता है तथा इसमें तीन उत्तराखण्ड विधानसभा क्षेत्र बद्रीनाथ, थराली और कर्णप्रयाग आते है।

यह 3,525 वर्ग मील के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह अलकनन्दा नदी के तट पर बसा हुआ जिला है तथा उत्तराखण्ड के प्रमुख धार्मिक स्थलों मे से एक है। चमोली मे कई छोटे और बडे मन्दिर है जो रहने और खानेपीने की सुविधा प्रदान करते है तथा पर्यटको को अपनी और आकर्षित करते है। 

चमोली जिले की जनसंख्या व साक्षरता दर:

Literacy and Population in Chamoli District:

2011 की जनगणना के अनुसार चमोली गोपेश्वर नगर की कुल जनसंख्या 21,447 है जिसमे पुरूषाs की 11,432 और महिलाओं की 10,015 है। यहाँ लिंगानुपात दर 863 है जोकि 963 राष्ट्रीय अनुपात से बहुत कम है। यहाँ की साक्षरता दर 82.47 प्रतिशत है जिसमें पुरूष साक्षरता 84.93 प्रतिशत है और महिलाओं की 79.67 प्रतिशत है।

यहाँ की जनसंख्या में हिन्दू धर्म के लोगो की आबादी 95.92 प्रतिशत, 3.75 प्रतिशत इस्लाम, 0.18 प्रतिशत ईसाई, 0.02 प्रतिशत सिख, 0.02 प्रतिशत बौद् तथा 0.06 प्रतिशत अन्य धर्मो का अनुसरण करने वाले है।

HEMKUND SAHIB
HEMKUND SAHIB

चमोली जिले का इतिहास:

History of chamoli District:

चमोली को किलों की भूमि भी कहा जाता है। गढवाल को केदारखण्ड के नाम से भी जाना जाता था। केदार खण्ड का अर्थ भगवान का घर होता है।

उत्तराखण्ड में सबसे पहले कत्यूरी राजाओं का शासन हुआ करता था। कत्यूरी शासनकाल के बाद गढवाल साठ से अधिक राजवंशों मे विभाजित हुआ।

गढवाल के इतिहास में महत्तवपूर्ण घटना तब हुई जब गोरखों ने कुमाऊॅ जीतने के बाद गढवाल पर भी आक्रमण कर दिया। गोरखा लोग अति क्रुर हुआ करते थे तथा नरसंहार लूटमारी के लिए प्रसिद्ध थे। ये गोरखायनी कहकर भी सम्बोधित किये जाते थे।

गोरखा लोग युद्ध करते हुए जीतते हुए लंगूरगढ तक पहुच गये थे, परन्तु चीन के आक्रमण की खबर सुनकर उन्होने अपने आक्रमण को कुछ समय के लिए रोक दिया था, परन्तु बाद में सन 1803 को उन्होने फिर से आक्रमण कर दिया।

गोरखों की विशाल सेना के सामने गढवाल की फौज बहुत कम थी। गोरखों की विशाल फौज के सामनें गढवाल के 5000 सैनिक टिक नही पाये तथा युद्ध में मारे गये, इससें गढवाल को बहुत अधिक नुकसान हुआ तथा वहाँ के राजा प्रदयुमन शाह स्वयं देहरादून में खुडबुडा के युद्ध में मारे गये।

1804 तक पूरे गढवाल पर साथ ही कांगडा तक गोरखों का अधिपत्य स्थापित हो गया जिन्होने पूरे 12 साल तक गढवाल पर राज करने के बाद 1815 को अंग्रेजो द्धारा यहाँ आक्रमण कर दिया गया और खदेडते हुए गोरखों को काली नदी के पार भेज दिया गया।

TUNGNATH TEMPLE
TUNGNATH TEMPLE

ये युद्ध पूरे 1 वर्ष तक चला था, तत्परान्त गढवाल के आधे से ज्यादा भाग पर अंग्रेजो का आधिपत्य स्थापित हो गया था जिसे ब्रिटिश गढवाल कहा जाने लगा।

पश्चिम का भाग जो कि राजा सुर्दशन शाह के अधीन था, उन्होने अपनी राजधानी टिहरी में स्थापित कर ली थी। बाद में 1960 मे चमोली जिले की स्थापना हुई।

चमोली जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल:

Famous Tourist Places in Chamoli District:

यह अपनी प्राकृतिक सौन्दरता धार्मिक पर्यटन के लिए देशविदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रसिद्ध स्थानों में वसुंधरा जल प्रपात, गोपेश्वर, औली, फूलों की धाटी, बद्रीनाथ, नंदप्रयाग, तप्तकुण्ड, हेमकुण्ड साहिब, पंचप्रयाग, देवप्रयाग, विष्णुप्रयाग, फूलो की घाटी, अनूसूया माता मंदिर आदि प्रमुख मंदिर है।

गोपेश्वरः Gopeshwar: प्राकृतिक दृश्यों के अलावा चमोली धार्मिक पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध है। गोपेश्वरचमोली जिले के खास धार्मिक स्थलों में से एक में गिना जाता है। बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालु गोपश्वर के शिव मंदिर के दर्शन अवश्य करते है।

बद्रीनाथ और केदारनाथ के सफर के दौरान बीच में गोपेश्वर पडता है। इस स्थान के बाद मे विष्णु भगवान के बाद शिव के मंदिरो की स्थली प्रारम्भ होती है।

फूलो की धाटीः Valley of Flowers: फूलों की धाटी विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जिसे देखने दूरदूर से सैलानी यहाँ पहुचते है। यह पर्यटन स्थल उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से आता है।

यह स्थान लगभग 500 से ज्यादा प्रजातियों के फूलों के लिए प्रसिद्ध है जिसे यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहरों की सूची में भी शामिल किया गया है। फूलो की घाटी प्रमुख ट्रैक रूट के लिए भी प्रसिद्ध है।

इसकी खोज विदेशी ट्रैवलर फ्रैंक स्मिथ ने की थी। यहाँ आपको कई प्रकार की वनस्पति को देखने का भी मौका मिलता है जिनमें से कई की शक्ल आपकों जीवों जैसी प्रतीत होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी यही संजीवनी बूटी लेने आये थे। सन 1982 को इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था।

BEDNI BUGYAL, CHAMOLI
BEDNI BUGYAL, CHAMOLI

नंदप्रयागः Nandprayag: नंदप्रयाग हिन्दुओं का पवित्र स्थली है जो समुद्र तल से लगभग 2805 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ पर मन्दाकिनी 

अलकनंदा की संगम स्थली है। यहाँ पर एक गोपाल जी का प्रसिद्ध मंदिर है।

यह कभी यदु वंश का हिस्सा हुआ करता था। कई धार्मिक मान्यताए जुडी होने के कारण ये घार्मिक पर्यटन करने वालो के लिए मुख्य विशेषता रखता है।

औलीः Auli: औली एक खूबसूरत जगह है जो पर्यटन प्रेमियों के लिए एक विशेष स्थान रखते है। यहाँ पर बडेबडे बर्फ से ढके पहाडों विशेष रूप से स्कीइंग का आन्नद भी ले सकते है। यहाँ पर होने वाली स्की प्रतियोगिता पर्यटकों अपनी और आकर्षित करते है।

यहाँ पर जोशीमठ के रास्ते आप औली पहुँच सकते है जो यहाँ से 16 किमी की दूरी पर स्थित है।

साहसिक पर्यटन करने वाले पर्यटकों के लिए यहाँ प्रतिवर्ष गढवाल मंडल द्धारा कई साहसिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है।

यहाँ से आप नंदादेवी, कामेत और दुनागिरी पर्वतों की सुन्दरता का आन्नद ले सकते है। यहाँ पर जनवरी से मार्च तक औली पूरी तरह से बर्फ से ढक जाता है।

AULI, CHAMOLI
AULI, CHAMOLI

अनसूया माता मंदिरः Ansuya Mata Mandir: अनसूया माता मंदिर यहाँ का एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में निसंतान दम्पति पुत्र प्राप्ति हेतु आते है। यह सडक से 5 किमी की चढायी चढने पर आता है। यहाँ से भगवान रूद्रनाथ के मंदिर हेतु भी जाया जा सकता है।

तप्तकुण्डः Taptkund: तप्तकुण्ड अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। यहाँ गर्म पानी का कुण्ड भी है जहाँ का पानी साल भर गर्म होता है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस कुण्ड में स्नान करना आवश्यक होता है।

यह मंदिर प्रतिवर्ष अप्रैल से मई के माह में ही खुलता है। इसके अलावा बद्रीनाथ में चार बद्री भी है जिसे सम्मिलित रूप से पंच बद्री भी कहा जाता है।

लोकपाल झीलः Lokpal Jheel: इस स्थल को वैदिक तीर्थस्थल के रूप मे जाना जाता है जो समुद्र तल से 4329 मीटर की ऊॅचाई पर स्थित है। यह पर्वत लोकपाल पर्वत सप्तऋषि पर्वत से घिरा हुआ है। इन्ही पर्वत चोटियो सें इन में शुद्ध जल आता है तथा इस झील से ही हिमगंगा नामक पवित्र नदी भी निकलती है।

भगवान श्री लक्ष्मण ने शेषनाग रूप अवतार लेकर इसी झील के पानी के नीचे बैठकर तपस्या की थी तथा उनके ऊपर विष्णु भगवान उनकी पीठ पर सो गये थे। विष्णु जी के नाम पर ही इसका नाम लोकपाल झील पडा, क्योकि विष्णु भगवान ही पृथ्वी पर चर, अचर, नभचर एवं थलचर प्राणियों की रक्षा करते है।

हेमकुण्ड साहिबः Hemkund Sahib: हेमकुण्ड साहिब सिख धर्म को मानने वाले लोगों के लिए एक अति महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। यहाँ एक पवित्र सरोवर भी है जिसे स्नो लेक के नाम से भी जाना जाता हैं। यह समुद्र तल से 4329 मीटर की दूरी पर स्थित है।

यह स्थान चारों और से बर्फ से ढकें सात पर्वतों से घिरा हुआ है जिन्हे हेमकुण्ड पर्वत भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार यहाँ सिखों के दसवें गुरू गोविन्द सिंह द्धारा तपस्या की गई थी। यहाँ आने का सबसे सही समय जुलाई से अक्टूबर तक है उसके बाद यहाँ अधिकतर समय बर्फ पडी रहती हैं।

AULI GAMES, CHAMOLI
AULI GAMES, CHAMOLI

बद्रीनाथः Badrinath Dham: बद्रीनाथ धाम हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है। यह चार धामों में से एक है और देश के प्रमुख धर्मिक स्थानों में से एक है।

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है जिसका निर्माण आदि गुरू शंकराचार्य जी ने करवाया था तथा इसका पुर्ननिर्माण दो शताब्दी पूर्व गढवाल के राजाओं ने करवाया था। यह चारो और से बर्फ से ढके पहाडो से घिरा हुआ है।

पौराणिक कथाओं मान्यता अनुसार विष्णु भगवान गहन तप पर बैठे हुए थे, तप के दौरान ही हिमपात होने लगा था, उनको बर्फबारी से बचाने के लिए लक्ष्मी माता ने बदरी यानि बेर के पेड का रूप धारण कर लिया।

जब विष्णु भगवान को पता लगा कि लक्ष्मी माता ने उनकी रक्षा की है तब से ही उन्होने कहा कि उनके साथ देवी लक्ष्मी भी बदरी के नाम से पूजी जाएंगी।

वसुंधरा जल प्रपातः Vasundhra jal Prapat: गढवाल अपनी खूबसूरती जल प्रपातों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कई सारे जल प्रपात आते है परन्तु वसुंधरा जल प्रपात का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वसुंधरा जल प्रपात, धार्मिक स्थल बद्रीनाथ से 9 किमी आगे है।

बद्रीनाथ से 3 किमी गाडी से माना गाँव पहुचॅना पडता है जोकि भारत की सीमा का अन्तिम गाँव है। यहाँ से आप 3 किमी की ट्रैकिंग यात्रा करके यहाँ पहुँच सकते है। इस जल प्रपात की ऊॅचाई लगभग 400 फीट है ये यहाँ के पर्यटक स्थलो में से मुख्य है।

उत्तरकाशी

Uttarkashi

HAR-KI-DUN, UTTARKASHI
HAR-KI-DUN, UTTARKASHI

उत्तरकाशी जिले को हिंदी में जाने:

About Uttarkashi in Hindi:

उत्तरकाशी उत्तराखण्ड का एक दर्शनीय प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण जिला है जिसका मुख्यालय उत्तरकाशी शहर है। यह जिला 24 फरवरी, 1960 को अस्तित्व में आया था। इसका पुराना नाम बाडाहाट था।

ये भगवान शंकर का निवास स्थान भी माना जाता है इसलिये इसे शिव की नगरी उत्तर की काशी कहकर भी पुकारा जाता है। यह ऋषिकेश से 148 किमी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 372 किमी0 की दूरी पर स्थित है। यह कुल 8,016 वर्ग किमी में फैला हुआ जिला है।

Literacy and population in Uttarkashi:

उत्तरकाशी की जनसंख्या व साक्षरता दर:

2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या 3,30,090 है। यहाँ की साक्षरता दर 75.81 प्रतिशत है।

GANGOTRI NATIONAL PARK
GANGOTRI NATIONAL PARK

उत्तरकाशी की लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्र:

Loksabha and Vidhansabha Area in Uttarkashi:

यह लोकसभा में टिहरी सीट के अन्तर्गत आता है तथा उत्तराखण्ड विधानसभा में इसके अन्तर्गत 3 विधानसभा क्षेत्र गंगोत्री, यमुनोत्री पुरोला सीट आती है। यह 6 तहसीलों और 2 उप तहसीलों में बटा हुआ है।

उत्तरकाशी की सीमायें पूर्व में चमोली रूद्रप्रयाग, पश्चिम में देहरादून, उत्तर में हिमांचल चीन तथा दक्षिण में टिहरी जिले तक फैली हुई है। यह चारों और सें पहाडों से घिरा हुआ जिला है।

History of Uttarkashi:

उत्तरकाशी का इतिहास:

यह स्थल सैलानियों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। सर्दियों के समय यहाँ काफी मात्रा में बर्फ पडती है जिस कारण सर्दियों में ये जिला पूरा बर्फीला हो जाता है तथा बडी संख्या में यात्री यहाँ बर्फबारी का आन्नद लेने के लिए आते है।

यह भागीरथी नदी के तट पर बसा हुआ है जोकि गंगा यमुना नदी का उदगम स्थल भी कहा जाता है। गंगा नदी गोमुख से निकलती है तथा यमुना नदी का उदगम स्थल यमुनोत्री है। यह एक प्रमुख तीर्थ यात्रा केन्द्र है।

यहाँ ऋषियों ने कई साल तक तपस्या की थी। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध घाट मणिकर्णिका है तथा वाराणसी में भी एक घाट का नाम मणिकर्णिका है ये दोनो ही भगवान विश्वनाथ को समर्पित हैं। यहाँ विश्वनाथ जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है।

यहाँ एक तरफ से पहाडों के बीच से नदी बहती है तो दूसरी और धने पहाड और जंगल दिखाई पडते है।

उत्तरकाशी के मुख्य व्यंजन:

Famous Food in Uttarkashi:

यहाँ के मुख्य व्यंजनों में रोटी, चावल, रायता, झंगुरा, मंडुआ मुख्य स्थान रखते है। यहाँ के अधिकांश रेस्टोरेन्टो में आपको वेज नान वेज दोनो तरह का भोजन उपलब्ध हो जायेगा।

यहाँ ठंड अधिक होने के कारण यहा लोग मीट मछली खाना ज्यादा पसंद करते है इसलिए नानवेज इनके रोज के खाने में शामिल रहता है। यहाँ कुछ होटलो में विशेष आर्डर पर वहाँ  का पारम्परिक भोजन भी उपलब्ध हो जाता है।

GANGOTRI TEMPLE
GANGOTRI TEMPLE

उत्तरकाशी के प्रमुख मंदिर:

Famous Temples in Uttarkashi:

ये स्थान अपने मंदिरो, ¼mRrjk[k.M ds efUnjks ds ckjs vkSj tkuus ds fy, i<s½s पर्यटन स्थलों, बुग्यालों ट्रैको आदि के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

यहाँ के प्रमुख मंदिरों में गंगोत्री, यमुनोत्री, विश्वनाथ मंदिर, शक्ति पीठ, कुटेटी देवी, रेनुका देवी, भैरव देवता का मन्दिर, शनि मंदिर, पोखू देवता मंदिर, कर्णदेवता मन्दिर, दुर्योधन मंदिर, कपिलमुनि आश्रम, चौरंगीखाल आदि प्रमुख मंदिरों में सेs एक है।

उत्तरकाशी के प्रमुख मेले:

Famous Fairs in Uttarkashi:

उत्तरकाशी गढ़वाल में एक प्रमुख व अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक विकसित होने के कारण यहाँ मेलो का आयोजन भी होता रहता है।

यहाँ के प्रमुख मेलों में माघ मेला, बिस्सू मेला, कन्डक मेला, खरसाली मेला आदि मुख्य है।

उत्तरकाशी के प्रमुख पर्यटन स्थल:

Famous Tourist Places in Uttarkashi:

यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गंगनानी, हर्षिल, यमुनोत्री, गौमुख, तपोवन, गंगोत्री, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, लंका भैरो धाटी, हरकीदून आदि प्रमुख है।

उत्तरकाशी की जल विद्युत् परियोजना:

यहाँ की जल विद्युत परियोजनाओं में मनेरीभाली फेज 1, फेज 2, धरासू पावर स्टेशन, लोहारीनागपाला आदि प्रमुख है।

UTTARKASHI
UTTARKASHI

उत्तरकाशी जिले के प्रमुख ग्लेशियर:

Famous Glaciers in Uttarkashi:

यहाँ के मुख्य ग्लेशियरों mRrjk[k.M ds vU; Xysf“k;jks ds ckjs es vf/kd tkuus ds fy, iMsA में गंगोत्री ग्लेशियर, यमुनोत्री ग्लेशियर, डोरियानि ग्लेशियर, बंदरपूंछ ग्लेशियर आदि मुख्य है।

उत्तरकाशी जिले के प्रमुख उद्यान व बुग्याल:

Famous Parks and Bugyal in uttarkashi:

यहाँ के राष्ट्रीय उद्यानों में गोविन्द राष्ट्रीय उद्यानों गंगोत्री वन्यजीव विहार प्रमुख है व प्रसिद्ध बुग्यालों में दयारा बुग्याल, हरकीदून बुग्याल, तपोवन बुग्याल, पंवाली कांठा आदि मुख्य है।

उत्तरकाशी जिले के प्रमुख ताल व कुंड:

Famous Tal and Kund in Uttarkashi District:

यहाँ के प्रसिद्ध तालों में डोडीताल, नचिकेता ताल, काणाताल, बंयाताल(उबलता ताल), लामाताल, देवसाडीताल, रोहीसाडाताल आदि प्रमुख है प्रमुख कुण्डों में देवकुण्ड, गंगनानी और सूर्यकुण्ड मुख्य है।

GANGOTRI GLACIER
GANGOTRI GLACIER

उत्तरकाशी के प्रमुख मंदिर और पर्यटक स्थल व उनकी जानकारी हिंदी में:

Famous Temples and tourist Places in Uttarkashi in Hindi:

विश्वनाथ मंदिरः Vishvanath Temple: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो उत्तरकाशी शहर के बीचो बीच स्थित है। यहाँ के शिवलिंग की चौड़ाई 90 मीटर लंबाई 15 इंच है। चार धाम जाने वाले यात्रियों के लिए इस मंदिर में जाना अनिवार्य होता है। यहाँ बहती भागीरथी नदी इस स्थान को मनोरम और महत्तवपूर्ण बनाती है।

शक्ति मंदिरः Shakti
Temple:
 यह मंदिर उत्तरकाशी के प्रमुख मंदिरो में से एक है। इस मंदिर में 6 मीटर ऊॅचा 90 सेमी0 परिधि वाला एक त्रिशूल विराजमान है जिसका उपरी भाग लोहे का तथा निचला भाग तांबे का है।

डोडीतालः Dodital: यह उत्तरकाशी में मुख्य तालों में से एक है जोकि समुद्र तल से 3307 मीटर की ऊॅचाई पर बसा हुआ है। यह चाराs तरफ से जंगलो से धिरा हुआ है जो यहाँ आने वाले सैलानियों को अपनी और आकर्षित करता है।

दयारा बुग्यालः Dayara
Bugyal:
 यह उत्तरकाशी के प्रमुख बुग्यालों में सें एक है। यहाँ एक छोटी सी झील भी है जहाँ से हिमालय का अत्यन्त मनमोहक दृश्य दिखाई पडता है। सर्दियों के मौसम में यह स्थान पर्यटको से गुलजार रहता है।

सर्दियों मे यह जगह आपको बर्फ की चादर सी प्रतीत होती है। यहाँ चारो और बस बर्फ ही बर्फ दिखाई देती है। यह एक विश्व प्रसिद्ध बुग्याल भी है जिसको देखने प्रतिवर्ष हजारों लोग यहाँ आते है।

GANGOTRI RIVER
GANGOTRI RIVER

नचिकेता तालः Nachiketa Taal: यह उत्तरकाशी के मुख्य तालों मे से एक है। इस तालों के चारों और हरियाली ही हरियाली है। यहाँ से हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी पर्वत श्रंखला की खूबसूरती देखते ही बनती है। यहाँ पर एक छोटा या मंदिर भी है तथा उत्तरकाशी से 32 किमी की दूरी पर स्थित है।

गंगोत्रीः Gangotri: यह उत्तरकाशी का एक प्रमुख मंदिर है जिसकी गिनती चार धामों में से होती है। यह देवप्रयाग के अन्तर्गत आता है। यहाँ प्रतिवर्ष लाखों लोग दर्शन हेतु आते है।

यह मन्दिर जून से नवम्बर तक खुला रहता है उसके बाद यहाँ अत्यन्त बर्फबारी के कारण यहाँ का तापमान भी माईनस डिग्री से कम हो जाने के कारण यहाँ के रास्ते बन्द हो जाते है जिस कारण यहाँ पहुचना भी मुश्किल हो जाता है। यहाँ से 18 किमी की दूरी पर ही विश्व प्रसिद्ध गोमुख धाम है जहाँ से पवित्र गंगा नदी निकलती है। गंगा का प्राचीन नाम भागीरथी था, देवप्रयाग में आकर ही भागीरथी और अलकनंदा का मिलन होता है तथा यही से यह नदी गंगा का नाम धारण करती है।

यमुनोत्रीः Yamunotri Temple: यह चार धामों में से एक अन्य धाम है जिसे देखने प्रतिवर्ष असंख्य लोग यहाँ आते है। यही से पवित्र यमुना जी का उदगम होता है। मान्यता के अनुसार यमुना जी यमराज की बहन थी, इसलिये कहा जाता है कि यहाँ स्नान करने सें मौत आने में कठिनाई नही होती है।

यह धार्मिक के साथ एक प्रसिद् पर्यटक स्थल भी है जहाँ से हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी चोटियां, हिमनद ट्रैकिंग का आन्नद भी लिया जा सकता है। यह मन्दिर जून से नवम्बर तक खुला रहता है उसके बाद यहाँ अत्यन्त बर्फबारी के कारण यहाँ का तापमान भी माईनस डिग्री से कम हो जाने के कारण यहाँ के रास्ते बन्द हो जाते है जिस कारण यहाँ पहुचना भी मुश्किल हो जाता है।

हरकीदूनः Har ki Dun: यह एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जिसे देखने प्रकृति प्रेमी प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में यहाँ आते है। यहाँ बर्फ की चोटिया, साहसिक एडवेन्चर वाले खेल पर्यटकाs को बहुत ज्यादा पसन्द आते है। यहाँ से कई जगहों के लिए ट्रैकिंग का आन्नद भी लिया जा सकता है।

UTTARKASHI
UTTARKASHI

यहाँ हर तरफ आपका धने जंगल मनोरम पहाड दिखाई देंगे जो बहुत ही मनोरम दिखाई देते है। छुटिटयो नये साल के दौरान यहाँ पर्यटको की संख्या भी बहुत बढ जाती है जिस कारण यहाँ के सारे होटल गेस्ट हाउस उस दौरान पैक मिलते है। 

हर्षिलः Harshil:: यह जिला उत्तरकाशी मे स्थित है जो गंगोत्री जाने वाले मार्ग के मघ्य में पडता है तथा भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह समुद्र तल से 2,620 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान प्राकृतिक सौन्दरता से परिपूर्ण है जिसे देखने प्रतिवर्ष हजारों लोग यहाँ आते है तथा यहाँ की असीम शान्ति बर्फ से ढके हुए पहाडो पर प्रकृति का आन्नद लेते है।

यहाँ पूरी धाटी में देवदार के वृक्ष बहुत मनोरम दिखाई पडते है साथ ही पूरी धाटी में नदी, नालों जल प्रपातों की भरमार है। छुटिटयो नये साल के दौरान यहाँ पर्यटको की संख्या भी बहुत अधिक बढ जाती है जिस कारण यहाँ के सारे होटल गेस्ट हाउस उस दौरान पैक मिलते है।

रूद्रप्रयाग

Rudraprayag

KARTIKSWAMI TEMPLE
KARTIKSWAMI TEMPLE

Know about Rudraprayag District in Hindi

रुद्रप्रयाग जिले के बारे में जाने हिंदी में:

रूद्रप्रयाग उत्तराखण्ड में बसा हुआ एक जिला है जिसके अन्दर रूद्रप्रयाग एक छोटा सा शहर नगर पंचायत है। यहाँ का कुल क्षेत्रफल 2439 वर्ग किमी है।

इससें पहले रूद्रप्रयाग जिला तीन जिलों चमोली, पौडी टिहरी का हिस्सा था जिसे उत्तर प्रदेश में मायावती के मुख्यमंत्री काल में 16 सितम्बर 1997 को अलग करके नया जिला बनाया गया था।       

इस जिले का मुख्यालय भी रूद्रप्रयाग में स्थित है। यह अलकनंदा और मंदाकिनी के तट पर स्थित है तथा इन दोनों नदियों की संगम स्थली भी है। ये भगवान शिव की नगरी है भगवान शिव को रूद्र भी कहा जाता है इसलियें भगवान शिव के नाम पर इस स्थल का नाम रूद्रप्रयाग रखा गया है।

रुद्रप्रयाग की साक्षरता दर व जनसंख्या:

Population and Literacy Rate in Rudraprayag:

2011 की जनगणना के अनुसार रूद्रप्रयाग जिले की जनसंख्या 242,285 है जहाँ पुरूषों की जनसंख्या 1,14,589 तथा महिलाओं की जनसंख्या 1,27,696 है।

यहाँ की साक्षरता दर 81.30 प्रतिशत है जिसमें महिलाए 70.35 प्रतिशत तथा पुरूषों की साक्षरता दर 93.90 प्रतिशत है।

यह समुद तल से 610 मीटर की ऊॅचाई पर स्थित है। इसके उत्तर में जिला उत्तरकाशी, पूर्व में जिला चमोली, दक्षिण में जिला पौडी और पश्चिम में टिहरी जिले s घिरा हुआ है।

रुद्रप्रयाग के प्रमुख पर्यटक स्थल:

Famous tourist places in Rudraprayag:

यहाँ के प्रसिद् पर्यटक स्थलो में केदारनाथ धाम, अगस्तमुनि, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, गौरीकुण्ड, खिरसू, चोपता, कोटेश्वर मंदिर, रूद्रनाथ मंदिर, तुंगनाथ मंदिर, मदमहेश्वर, त्रिजुगीनारायण, ऊखीमठ, कालीमठ, उमा नारायण मंदिर, चंद्रशिला, वासुकीताल, देवरिया ताल, गांधी सरोवर आदि मुख्य पर्यटक स्थल है।

CHANDRASHILA PEAK
CHANDRASHILA PEAK

रुद्रप्रयाग जिले के धार्मिक स्थल व पर्यटक स्थल को जाने हिंदी में:

Know about Tourist and Religious Places

of district Rudraprayag in Hindi:

कोटेश्वर मंदिरः Koteshwar Temple: कोटेश्वर मंदिर, रूद्रप्रयाग से 3 किमी की दूरी पर स्थित एक प्रख्यात मंदिर है। कोटेश्वर मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर बसा हुआ है तथा एक गुफा के अन्दर बसा हुआ है। यहाँ की मूर्तियों का स्वाभाविक रूप से गठन हुआ है।

मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाते समय इसी गुफा में साधना की थी। महाशिवरात्री के समय पर यहाँ पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

Khirsu खिरसूः यह रूद्रप्रयाग जिले का एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटक स्थल है जिसका भ्रमण हेतु प्रतिवर्ष हजारों सैलानी यहाँ आते है। यह समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तथा हिमालय पर्वत के मध्य में बसा हुआ है।

पौडी गढवाल से इसकी दूरी 19 किमी है। इसके चारों और बर्फ से धिरे हुए पहाड है जो पर्यटको को अपनी और आकर्षित करते है। यहाँ देवदार, ओक के पेड फलों के वृक्ष है।

सोनप्रयागः Sonprayag सोनप्रयाग उत्तराखण्ड का प्रसिद् धार्मिक स्थल है। यह समुद्र तल से 1829 मीटर की ऊॅचाई पर स्थित है। यह केदारनाथ मार्ग पर स्थित हैं यहाँ से केदारनाथ की दूरी लगभग 19 किमी है।

मान्यता के अनुसार यहाँ पर शिव जी पार्वती जी का विवाह हुआ था। मान्यता के अनुसार यहाँ के पानी को छूने से व्यक्ति बैकुंठ धाम जाता है।

अगस्त्यमुनिः Agastyamuni यह उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदाकिनी नदी के तट पर बसा हुआ है तथा समुद्र तल से इसकी ऊॅचाई 1000 मीटर है।

इसी स्थान पर अगस्तमुनि ने कई वर्षो तक तपस्या की थी, उन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम अगस्त्यमुनि पडा। बैसाखी के अवसर पर इस स्थान पर बहुत बडा मेला लगता है। यहाँ दूर दूर से श्रद्धालु अपने इष्ट देव की पूजा करने हेतु आते है।

CHOPTA
CHOPTA

गौरीकुण्डः Gorikund यह समुद्र तल से 1982 मीटर की ऊॅचाई पर स्थित है। सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड की दूरी 5 किमी है। केदारनाथ मार्ग पर गौरीकुण्ड अन्तिम बस स्टेशन है। केदारधाम मे प्रवेश करनें से पूर्व श्रद्धालु पहले इस कुण्ड में स्नान करते है।

यहाँ गौरीदेवी मंदिर है जहाँ  माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। गौरीकुण्ड का जल रामेश्वरम में चढाया जाता है जबकि रामेश्वरम का जल लाकर बद्रीनाथ में चढाते है।

केदारनाथः Kedarnath: केदारनाथ उत्तराखण्ड का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है जहाँ  देश विदेश के लोग दर्शन हेतु प्रतिवर्ष उत्तराखण्ड आते है। यह चार धामों में से भी एक है। चारों धामों में से सबसे ज्यादा पर्यटक केदारनाथ धाम में ही आते है।

यह हिन्दुओं का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह हिमालय की तलहटी मे बसा हुआ है तथा चारों और से बर्फ से ढके पहाडो से धिरा हुआ है। समुद्र तल से इसकी ऊॅचाई 3584 मीटर है।

KEDARNATH TEMPLE
KEDARNATH TEMPLE

भगवान शिव को केदार बाबा कहकर भी पुकारा जाता है इस लिए भगवान शिव के नाम पर इसका नाम केदारनाथ पडा। यह उत्तराखण्ड का सबसे विशाल शिव मन्दिर है जो कटवां पत्थरों को जोडकर बनाया गया है।

केदारनाथ धाम और यहाँ का मंदिर तीन तरफ s पहाडाs से धिरा हुआ है। इसके एक तरफ 22 हजार फुट ऊॅचा केदारनाथ दूसरी तरफ 21 हजार 600 फुट ऊॅचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ 22 हजार 700 फुट ऊॅचा भरतकुंड।

यहाँ पर पाँच नदियों का संगम भी होता है जिसमें मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी। इनमें से अधिकतर नदिया अभी लुप्त हो चुकी है परन्तु अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी वजूद में है।

दिपावली अथवा पडवा के बाद यहाँ के कपाट बंद कर दिये जाते है जो 6 माह तक बंद रहते है परन्तु आश्चर्य की बात ये होती है कि यहाँ 6 माह तक दीपक जलता रहता है और जब कपाट खुलते है तो दीपक जले हुए मिलते है। 

RUDRAPRAYAG
RUDRAPRAYAG

चोपताः Chopta चोपता उत्तराखण्ड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो रूद्रप्रयाग जिले में पडता है। यह समुद्र तल से 12000 फुट की ऊॅचाई पर स्थित है। यह गढवाल क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों s से आता है।

चोपता अपने बुग्यालों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह पूरा पंचकेदार का क्षेत्र कहलाता है। चोपता जाने के रास्ते में बांस बुरांश का जंगल है जो बहुत ही मनोहारी प्रतीत होता है। तुगनाथ का प्रसिद्ध मन्दिर भी यही पर स्थित है।

यहाँ से तुंगनाथ तक 3 किमी तक का क्षेत्र पूरी तरह से बुग्यालों के अन्तर्गत आता है। चोपता से गोपेश्वर जाने वाले मार्ग के मध्य कस्तूरी मृग प्रजनन फार्म है जहाँ से कस्तूरी मृगों की सुन्दरता को करीब से देखा जा सकता है।